पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन

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पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. बीजाण्ड का वह स्थान जहाँ बीजाण्डवृत्त जुड़ा होता है उसे कहते हैं ।
( क ) निभाग ( चलाजा )
( ख ) नाभिका ( हाइलम )
( ग ) केन्द्रक
( घ ) माइक्रोपाइल

प्रश्न 2. परागनलिका का अध्यावरण द्वारा बीजाण्ड में प्रवेश कहलाता हैं–
( क ) निभागी युग्मन
( ख ) अण्डद्वारी प्रवेश
( ग ) इनमें से दोनों
( घ ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 3. बहुसंघी दशा पाई जाती है –
( क ) बाह्य दलपुंज में
( ख ) जायांग में
( ग ) पुमंग में
( घ ) दलपुंज में

प्रश्न 4. प्रतिमुखी कोशिकाएं वह होती है जो उपस्थित होती है–
( क ) निभागीय छोर पर
( ख ) अण्डद्वार छोर पर
( ग ) मध्य में
( घ ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन- सी कोशिका/कोशिकाएं सभी प्रकार के भ्रूणपोष में पायी जाती हैं/हैं?
( क ) सहकोशिकाएं
( ख ) अण्डकोशिका
( ग ) प्रतिमुखी कोशिकाएं
( ग ) ये सभी

प्रश्न 6 . परिभ्रूणपोष ( पेरीस्पर्म ) अवशेष है –
( क ) बाह्म अध्यावरण का
( ख ) अन्त : अध्यावरण का
( ग ) बीजाण्डद्वार का
( घ ) बीजाण्डकाय का

प्रश्न 7 . द्विनिषेचन क्रिया होती है –
( क ) शैवालों में
( ख ) ब्रायोफाइट्स मे
( ग ) अनावृतबीजी पौधों में
( घ ) आवृतबीजी पौधों मे

प्रश्न 8. भारतीय भ्रूण – विज्ञान के जनक हैं–
( क ) राम उदर
( ख ) बी ० एन ० प्रसाद
( ग ) पी ० एन ० मेहरा
( घ ) पी माहेश्वरी

प्रश्न 9. नारियत का रेशे उत्पन्न करने वाला भाग है

( क ) बाहा फलभित्ति

( ख ) अन्तः फलभित्ति

( ग ) मध्य फलभित्ति

( घ ) तना तथा पत्ती

10. बहुभ्रूणता खोजी गई-
( क ) ल्यूवेनहॉक द्वारा
( ख ) माहेश्वरी द्वारा
( ग ) विन्कलर द्वारा
( घ ) कूपर द्वारा

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11. आवृतबीजी पौधों में पुंकेसर है-
( क ) मादा जननांग
( ख ) नर जननांग
( ग ) ( क ) व ( ख ) दोनों
( घ ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 12. एक ही पादप के एक पुष्प के परागकणों का दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्रों तक का स्थानान्तरण कहलाता है-
( क ) स्वयुग्मन
( ख ) सजातपुष्पी परागण
( ग ) परनिषेचन
( घ ) अनुन्मील्य परागण

प्रश्न 13. एक प्रारूपी – आवृतबीजी भ्रूणकोष परिपक्व होने पर होता है –
( क ) 7 केन्द्रकीय , 8 कोशिकीय
( ख ) 7 केन्द्रकीय , 7 कोशिकीय
( ग ) 8 केन्द्रकीय , 7 कोशिकीय
( घ ) 8 केन्द्रकीय , 8 कोशिकीय

प्रश्न 14. एक प्रारूपिक आवृतबीजी परागकोश में लघु बीजाणुधानियों संख्या होती है
( क ) 1

( ख ) 2
 ( ग ) 3

( घ ) 4

प्रश्न 15. 200 लघुबीजाणुओं के निर्माण के लिए प्रकार्यात्मक लघुबीजाण मातृ कोशिकाओं में कितने अर्द्धसूत्री विभाजन होंगे ?
( क ) 400

( ख ) 50
( ग ) 200

( घ ) 100

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प्रश्न 16. अण्ड समुच्चय के निर्माण में कौन सहायक है ?

( क ) अण्ड
( ख ) अण्ड व सहायक कोशाएँ
( ग ) अण्ड व प्रतिमुख कोशाएँ
( घ ) सहायक व प्रतिमुख कोशाएँ

प्रश्न 17. सैल्विया में परागण होता है
( क ) जल द्वारा

( ख ) वायु द्वारा
( ग ) कीटों द्वारा

( घ ) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 18. निम्नलिखित में से किसमें कीट परागण होता है ?

( क ) गुड़हल

( ख ) अंजीर
( ग ) गेहूँ

( घ ) हाइड्रिला

प्रश्न 19. यदि किसी पौधे की पत्ती की कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या 24 है तो उसके भ्रूणपोष में गुणसूत्रों की संख्या होती है
( क ) 12

( ख ) 24
( ग ) 36

( घ ) 48

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प्रश्न 20. निभाग पाया जाता है-
( क ) परागकण में
( ख ) बीजाण्ड में
( ग ) भ्रूणपोष
( घ ) ये सभी

प्रश्न 21. पुष्पीय पादप का कौन – सा भाग अगुणित ( n ) है ?
( क ) जड़
( ख ) पत्ती
( ग ) नर युग्मक
( घ ) युग्मनज

प्रश्न 22. इण्टरस्टीशियल किओज्मैटा किसमें पाये जाते हैं ?
( क ) यूनीवैलेन्ट्स में
( ख ) बाइवैलेन्ट्स में
( ग ) यूनी एवं बाइवैलेन्ट्स में
( घ ) इनमें से कोई नहीं

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. युक्तपुंकेसरी दशा किसे कहते हैं ?
उत्तर- जब किसी पुष्प के सभी पुंकेसर परस्पर संलग्न होते हैं , तब इसे युक्तपुंकेसरी दशा कहते हैं ।
जैसे— Cucurbitaceae family के पौधों में ।

प्रश्न 2. चतुर्दीर्धी पुंकेसर किसे कहते हैं ?
उत्तर- जब एक पुष्प के चार पुंकेसर लम्बे और दो पुंकेसर छोटे हों , तो इसे चतुर्दीर्घी अवस्था कहते हैं ।
जैसे- सरसों के पुष्प में ।

प्रश्न 3. युक्तकोषी दशा क्या है ?
उत्तर- इसमें केवल परागकोष ही आपस में जुड़े रहते हैं तथा पुंतन्तु स्वतन्त्र रहते हैं ,
जैसे — गेंदे में ।

प्रश्न 4. जौ या गेहूँ के 100 दाने बनाने के लिए कितने अर्द्धसूत्री प्र विभाजन की आवश्यकता होगी ?
उत्तर- जौ या गेहूँ के 100 दाने बनाने के लिए 125 अर्द्धसूत्री विभाजन की आवश्यकता होगी ।

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प्रश्न 5. पॉलीगोनम प्रकार के भ्रूणकोष में कितने केन्द्र उपस्थित होते है ?
उत्तर – परिपक्व भ्रूणकोष 8 केन्द्रकीय एवं 7 कोशिकीय होता है ।

प्रश्न 6. भ्रूणपोष का विकास आवृतबीजी पौधों में किस प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है ?
उत्तर द्विनिषेचन के पश्चात् होता है ।

प्रश्न 7. प्रजनन की पाल्मेला स्टेज किस पादप में पाई जाती है ?
उत्तर- प्रजनन की पाल्मेला स्टेज क्लेमाइडोमोनास में पाई जाती है ।
प्रश्न 8. किन्हीं दो आभासी फलों के नाम लिखिए ।
उत्तर- 1. सेब तथा 2. स्ट्रॉबेरी ।

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प्रश्न 9. दो बीजों के नाम लिखिए जिनमें बीज के परिपक्व होने से पूर्व भ्रूणपोष विकासशील भ्रूण द्वारा उपभोग कर लिया जाता है ।
उत्तर- 1. चना तथा 2. सेम ।

प्रश्न 10. एक परिपक्व परागकण में समाहित कोशिकाओं के नाम लिखिए ।
उत्तर- जनन कोशिका एवं वर्धी कोशिका ।

प्रश्न 11. मांसल फल किसे कहते हैं ? इनके महत्त्व का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर – जिन फलों में फलभित्ति सरस तथा गूदेदार होती है , वे मांसल फल कहलाते हैं । इनकी फलभित्ति को बाह्य फलभित्ति , मध्य फलभित्ति तथा अन्तः फलभित्ति में विभेदित किया जा सकता है । ये फल अटक होते हैं जिस कारण इनके बीज गूदा सड़ने के बाद ही स्वतन्त्र होते हैं ।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. उन्मील परागणी पुष्पों से क्या तात्पर्य है ? क्या अनुन्मीलिय पुष्पों तथ तीन में पर – परागण सम्पन्न होता है ? अपने उत्तर की सतर्क व्याख्या करे।
उत्तर- वे पुष्प जिनके परागकोश तथा वर्तिकाग्र अनावृत ( exposed ) होते हैं उन्मील परागणी पुष्प कहलाते हैं। उदाहरण वायोला, आक्जेलिस। अनुन्मीलिय पुष्पों में पर – परागण नहीं होता है । अनुन्मीलिय पुष्प क्रम नहीं होते हैं । अतः इनमें पर – परागण सम्भव नहीं होता है । इस प्रकार छत पुष्पों के परागकोश तथा वर्तिकाग्र पास – पास स्थित होते हैं । परागकोश के स्फुटित होने पर परागकण वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आकर परागण करते हैं । पु अतः अनुन्मीलिय पुष्प स्व – परागण ही करते हैं ।

प्रश्न 2. बैगिंग ( बोरावस्त्रावरण ) या थैली लगाना तकनीक क्या है ? पादप जनन कार्यक्रम में यह कैसे उपयोगी है ? उत्तर- बैगिंग ( बोरावस्त्रावरण ) एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा परागण में ऐच्छिक परागकणों का उपयोग तथा वर्तिकाग्र को अनैच्छिक परागकणों से बचाना सुनिश्चित किया जाता है । बैगिंग के अन्तर्गत विपुंसित पुष्पों को थैली से ढककर , इनके वर्तिकाग्र को अवांछित परागकणों से बचाया जाता है । पादप जनन में इस तकनीक द्वारा फसलों को उन्नतशील बनाया जाता है तथा सिर्फ ऐच्छिक गुणों वाले परागकण व वर्तिकाग्र के मध्य परागण सुनिश्चित कराया जाता है ।

प्रश्न 3. त्रि – संलयन क्या है ? यह कहाँ और कैसे सम्पन्न होता है ? त्रि – संलयन में सम्मिलित न्यूक्लीआई का नाम बताएँ ।
उत्तर- परागनलिका से मुक्त दोनों नर केन्द्रकों में से एक मादा केन्द्रक से संयोजन करता है । दूसरा नर केन्द्रक भ्रूणकोष में स्थित द्वितीयक केन्द्रक ( 2n ) से संयोजन करता है । द्वितीयक केन्द्रक में दो केन्द्रक पहले से होते हैं तथा नर केन्द्रक से संलयन के पश्चात् केन्द्रकों की संख्या तीन हो जाती है । तीन केन्द्रकों का यह संलयन , त्रिसंलयन ( triple fusion ) कहलाता है । त्रिसंलयन की प्रक्रिया भ्रूणकोष में होती है तथा इसमें ध्रुवीय केन्द्रक अर्थात् द्वितीयक केन्द्रक व नर केन्द्रक सम्मिलित होते हैं ।

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 . पर-परागण से होने वाले लाभ तथा हानि का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- पर – परागण से लाभ – पर – परागण से निम्नलिखित लाभ हैं-
1. पर – परागित पुष्पों से बनने वाले फल बड़े , भारी एवं स्वादिष्ट तथा इनमें बीजों की संख्या अधिक होती है ।
2. पर – परागण से उत्पन्न बीज भी बड़े , भारी , स्वस्थ एवं अच्छी नस्ल वाले होते हैं, जिससे उपज बढ़ जाती है।
3. इन बीजों से उत्पन्न पौधे भी बड़े , भारी , स्वस्थ एवं सक्षम होते हैं तथा अण्ड सम् इनमें प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की अधिक क्षमता होती है ।
4. पर- परागण द्वारा रोग अवरोधक ( disease resistant ) नयी जातियाँ तैयार की जा सकती हैं ।
5. पर – परागण से आनुवंशिक पुनर्योजन द्वारा विभिन्नताएँ उत्पन्न होती है ।
6. पर – परागण द्वारा प्रकृति में स्वतः ही पौधों की नई जातियाँ ( new varieties ) उत्पन्न होती रहती हैं जिनमें नये गुणों का समावेश होता है । तथा हाइब्रिड विगर ( hybrid vigour ) के कारण अच्छी संतति बनती है ।

पर – परागण से हानियाँ – अनेक लाभ होते हुए भी पर – परागण से निम्नलिखित हानियाँ भी हैं-
1. पर – परागण की क्रिया अनिश्चित ( uncertain ) होती है , क्योंकि कर परागण के लिए यह वायु , जल एवं जन्तु पर निर्भर होती है ।
2. परागित करने वाले साधनों की समय पर उपलब्धता न होने पर अधिकांश पुष्प परागित होने से रह जाते हैं ।
3. पर – परागण के लिए पुष्पों को दूसरे पुष्पों पर निर्भर रहना पड़ता है ।
4. कीटों को आकर्षित करने के लिये पुष्पों को चटकीले रंग , बड़े दल , सुगन्ध तथा मकरन्द उत्पन्न करना पड़ता है जिन सबमें अधिक पदार्थ का अपव्यय होता है तथा अधिक ऊर्जा का ह्रास होता है ।
5. पर – परागित पुष्पों , विशेषकर वायु परागित पुष्पों में परागकण अधिक संख्या में नष्ट होते हैं ।
6. पर – परागित बीज सदैव संकर ( hybrid ) होते हैं । रहता है , जिसे बीजाण्डवृन्त ( funicle or funiculus ) कहते हैं ।

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