बेरोजगारी पर निबंध

बेरोजगारी पर निबंध

बेरोजगारी पर निबंध

-: बेरोजगारी की समस्या :-

प्रस्तावना – हमारे देश की बेरोजगारी की समस्या का सीधा संबंध जनसंख्या वृद्धि से है। जितने अधिक नवयुवक तथा नवयुक्तियां हमारे गांव, कस्बों तथा नगरों में बढ़ते जाते हैं, उतनी ही अधिक गंभीर बेरोजगारी की समस्या बनती जाती है। आजकल बेरोजगारी की समस्या ने सामाजिक तथा राष्ट्रीय समस्या का गंभीर रूप धारण कर लिया है।


भारतवर्ष में बेरोजगारी के रूप – बेरोजगारी की समस्या के तीन रूप हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित पंक्तियों में प्रस्तुत किया जा रहा है —


कृषि सम्बन्धी बेरोजगारी की समस्या – यह समस्या देश के ग्रामीण क्षेत्र में पायी जाती हैं। वे मजदूर जो खेतों में काम करते हैं,उनको केवल कुछ समय के लिए ही काम अथवा रोजगार मिल पाता है। अतिरिक्त समय में वे बेरोजगार रहते हैं। छोटे कृषक भी इससे पीड़ित हैं। एक अध्ययन के अनुसार हमारे देश में लगभग 166 लाख लोग मौसमी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।

व्यवसायिक बेरोजगार की समस्या – यह समस्या बड़े नगरों में पाई जाती हैं, वहां पर मिलों तथा फैक्ट्ररियों में मशीनों का अधिक उपयोग किया जाता है, इस प्रकार मशीनीकरण के अधिक प्रयोग से बड़े नगरों में व्यवसायिक बेरोजगार की समस्या में वृद्धि होती है।


शिक्षा–संबंधी बेरोजगारी की समस्या – यह समस्या शिक्षा के क्षेत्र में ही विद्यमान हैं। शिक्षित युवाओं तथा युवतियों को रोजगार सरलता से नहीं मिल पाता है क्योंकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण है। छात्रों तथा छात्राओं को उपयोगी, उद्यमी तथा व्यवसायिक शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। शिक्षा संबंधी बेरोजगारी की समस्या से देश के सामने गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। वर्तमान में लाखो पढ़े लिखे लोग बेरोजगार है ।

बेरोजगारी के कारण – बेरोजगारी की समस्या के प्रमुख कारणों का वर्णन ‌निम्नलिखित है—
‌‌ (¡) देश में विद्यमान बेरोजगारी की समस्या का प्रमुख कारण तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या है। प्रतिवर्ष अधिकाधिक नवयुवक बेरोजगारों कि सूची में बढ़ते जाते हैं।


(¡¡) ‌ बेरोजगारी का दूसरा प्रमुख कारण वर्तमान दोषपुर्ण शिक्षा प्रणाली है। छात्र भावी जीवन में अपनी जीविका कमाने की कला नहीं सीख पाते हैं क्योंकि उन्हें उद्यम–सम्बन्धी तथा तकनीकी शिक्षा प्रदान नहीं की जाती है।


(¡¡¡) बड़े नगरों की मिलों तथा कारखानों में अत्यधिक मशीनीकरण से शहरी मजदूरों तथा श्रमिकों में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।

(¡v) ग्रामीण मजदूरों तथा छोटे किसानों को कृषि कार्य न होने वाले मौसम में किसी अन्य कार्य अथवा रोजगार का कोई भी प्रबंध नहीं है।


(¡v) ग्रामीण मजदूरों तथा छोटे किसानों को कृषि कार्य न होने वाले मौसम में किसी अन्य कार्य अथवा रोजगार का कोई भी प्रबंध नहीं है।

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बेरोजगारी के निवारण हेतु उपाय – देश की बेरोजगारी की समस्या के समाधान हेतु कुछ निवारण अथवा सुझावों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित प्रकार से हैं—


(¡) देश की बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक लगाए जाने की आवश्यकता है। जनसंख्या पर बिना रोक लगाएं, किसी भी क्षेत्र में वास्तविक प्रगति की बिल्कुल भी संभावना नहीं है। हमारी सभी योजनाएं तथा कार्यक्रम अधूरे तथा अपूर्व पड़े रहते हैं इसके लिए जन्म दर को कम से कम करना परम आवश्यक हो गया है।


(¡¡) बढ़ती हुई जनसंख्या पर प्रबल रोक लगाने के लिए परिवार नियोजन के कार्यक्रम को प्रभावपूर्ण ढंग से सफल बनाया जाना अति आवश्यक है।
हमें लड़के-लड़कियों का देर से विवाह करना चाहिए तथा एक या दो बच्चे ही उत्पन्न करना चाहिए। आदर्श परिवारों को पुरस्कार प्रदान किये जाने चाहिए।

(¡¡¡) वर्तमान शिक्षा– प्रणाली को रोजगार–परक बनाया जाना चाहिए। नवयुवकों तथा नवयुवतियों उद्धम–परक तथा व्यवसायिक शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए ताकि उससे उनको भावी जीवन में अपनी जीविका कमाने में सहायता मिले ।


(¡v) हमारे गांव में पड़ी अतिरिक्त भूमि को भूमिहीन मजदूरों तथा श्रमिकों के मध्य वितरित कर देना चाहिए। वे इस प्रकार की भूमि के ऊपर तरकारियां तथा शीघ्रता से उगने वाले फलदार वृक्ष लगायेगे‌ जीनसे उनको अतिरिक्त आमदनी होगी। उनको इस प्रकारोजगार का स्थायी साधन उपलब्ध हो जायेगा।


(v) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग–धंधों का विकास किया जाना चाहिए। उनके माध्यम से लोग अपने परिवार के सदस्यों की सहायता से छोटी-छोटी तथा आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करेंगे। भारतीय सरकार कोउनको आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

उपसंहार – भारतवर्ष एक विकासशील देश है, जहां पर नियंत्रित जनसंख्या, प्रभावपूर्ण परिवार नियोजन, व्यवहारिक शिक्षा, स्वरोजगार प्रबल, रोजगार परक योजनाएं बनाना तथा कुटीर उद्योग- धंधों की वर्तमान परिस्थितियों में परम आवश्यकता है। उसी दशा में बेरोजगारी की समस्या का समाधान सम्भव हो सकता है ।
पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत बहुत से विकास कार्यक्रम चालू हैं
तथा प्रगति कर रहे हैं।

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