मानव जनन

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बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. ब्लास्टुला अवस्था में भ्रूण को सर्वप्रथम गर्भाशय से जोड़ने का कार्य निम्न में से कौन – सी झिल्ली करती है ?

( क ) एम्निओन

( ख ) अपरा / कोरियोन

( ग ) ऐलेन्टॉयस

( घ ) योक सैक

प्रश्न 2 . स्त्री में अन्तर्रोपण के समय भ्रूण किस अवस्था में रहता है ?
( क ) मोरूला

( ख ) ब्लास्टुला
( ग ) गैस्टुला

( घ ) न्यूरूला

प्रश्न 3. एण्ड्रोजेन्स स्रावित होता है
( क ) लीडिंग कोशिकाओं द्वारा
( ख ) सर्टोली कोशिकाओं द्वारा
( ग ) स्पमैरिड्स द्वारा
( घ ) इनमें से कोई नहीं ।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लीडिग कोशिकाओं द्वारा संश्लेषित व स्रावित वृषण हार्मोन नाम लिखिए ।
उत्तर- लीडिंग कोशिकाएं ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन के नियन्त्रण में टेस्टोस्टिरॉन एवं एन्ड्रोजन हॉर्मोन का स्रावण करती हैं ।

प्रश्न 2. उस प्रक्रिया का नाम लिखिए जिसमें ग्राफी पुटक फटक द्वितीयक अंडक को अंडाशय में मोचित करता है ।

उत्तर- अण्डोत्सर्ग ( Ovulation ) |

प्रश्न 3. आर्तव चक्र क्या है ? आर्तव चक्र ( मेन्स्ट्रुअल साइकिल ) : कौन – से हार्मोन नियमन करते हैं ?
उत्तर – मादाओं ( प्राइमेट्स ) में अण्डाणु निर्माण 28 दिन के चक्र में होता है जिसे आर्तव चक्र अथवा मासिक चक्र या ऋतु स्त्राव चक्र कहते हैं । प्रत्येक स्त्री में यह चक्र 12-13 वर्ष की आयु से प्रारम्भ हो जाता है तथा 45-55 वर्ष की आयु में खत्म हो जाता है । यह चक्र अण्डाशय में अण्डाणु निर्माण को दर्शाता है तथा इसके प्रारम्भ होने के साथ ही मादा गर्भधारण में सक्षम हो जाती है । आर्तव चक्र ( मेन्सट्रुअल साइकिल ) का नियमन निम्न दो हार्मोन करते हैं- ( i ) LH हार्मोन ( ii ) FSH हार्मोन ।

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प्रश्न 4. हमारे समाज में पुत्रियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को दिया जाता है । बताएँ कि यह क्यों सही नहीं है ?
उत्तर- स्त्री में XX गुणसूत्र तथा पुरुष में XY गुणसूत्र पाये जाते हैं । जब स्त्री का X गुणसूत्र तथा पुरुष का y गुणसूत्र मिलते हैं तो पुत्र ( XY ) उत्पन्न होता है । इसके विपरीत स्त्री का x गुणसूत्र तथा पुरुष का x गुणसूत्र मिलने पर पुत्री ( XX ) उत्पन्न होती है । अतः उत्पन्न संतान का लिंग निर्धारण पुरुष के गुणसूत्र द्वारा होता है न कि स्त्री के गुणसूत्र से । चूँकि पुरुष में 50 % X तथा 50 % Y गुणसूत्र होते हैं । अतः पुरुष के गुणसूत्र का X या Y होना ही सन्तान के लिंग के लिए उत्तरदायी है । उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि पुत्रियों को जन्म देने का दोष महिलाओं को देना सर्वदा गलत है ।

प्रश्न 5. एक माह में मानव अण्डाशय से कितने अण्डे मोचित होते हैं ? यदि माता ने समरूप जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया हो तो आप क्या सोचते हैं कि कितने अण्डे मोचित हुए होंगे ? क्या आपका उत्तर बदलेगा यदि जन्मे हुए जुड़वाँ बच्चे द्विअण्ड यमज थे ?
उत्तर – एक माह में मानव अण्डाशय से सिर्फ एक अण्डा मोचित होता Sec है । समरूप जुड़वाँ बच्चों का जन्म होने पर भी एक माह में एक ही अण्डा मोचित हुआ होगा ।

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लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. अण्डजनन क्या है ? अण्डजनन की संक्षिप्त व्याख्या करें ।
उत्तर- स्त्री के अण्डाशय के जनन एपीथिलियम की कोशिकाओं से अण्डाणुओं का निर्माण , अण्डजनन कहलाता है । अण्डजनन निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होता है
( i ) प्रोलीफेरेशन प्रावस्था ( Proliferation Phase ) — इस अवस्था की शुरुआत उस समय से होती है जब मादा फीट्स ( foetus ) माँ के गर्भ में लगभग 7 माह की होती है । जनन कोशिकाएँ विभाजित होकर अण्डाशय की गुहा में कोशिका गुच्छ बना देती हैं जिसे पुटिका ( follicle ) कहते हैं । पुटिका की एक कोशिका आकार में बड़ी हो जाती है तथा इसे ऊगोनियम ( oogonium ) कहते हैं ।
( ii ) वृद्धि प्रावस्था ( Growth Phase ) – यह अवस्था भी उस समय पूरी हो जाती है जब मादा माँ के गर्भ में होती है । इस अवस्थ में ऊगोनियम पोषण कोशिकाओं से भोजन एकत्रित करते समय आकार में बड़ी हो जाती है उसे प्राथमिक उसाइट कहते हैं।
( iii ) परिपक्व प्रावस्था ( Maturation Phase ) – यह क्रिया पूरे जनन काल ( 11-45 ) वर्ष में लगातार होती रहती है । प्राथमिक ऊसाइट में पहला अर्द्धसूत्री विभाजन होता है तथा दो असमान कोशिकाएँ बन जाती हैं । बड़ी कोशिका द्वितीयक ऊसाइट ( secondary oocyte ) कहलाती है , जबकि छोटी कोशिका को प्रथम ध्रुवीकाय ( first polar body ) कहते हैं । यह विभाजन अण्डोत्सर्ग से पहले होता है । दूसरा समसूत्री विभाजन अण्डवाहिनी में , अण्डोत्सर्ग के बाद होता है । जिसके फलस्वरूप एक अण्डाणु तथा एक द्वितीयक ध्रुवीकाय ( second polar body ) बनती है । सभी ध्रुवीकाय नष्ट हो जाती हैं तथा इस सम्पूर्ण क्रिया में एक अण्डाणु प्राप्त होता है । ध्रुवीकाय का निर्माण अण्डाणुओं को पोषण प्रदान करने के लिए होता है ।  

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प्रश्न 2. प्लेसेण्टा पर टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर- प्रोटोथीरीअन स्तनधारी अण्डप्रजक ( oviparous ) जन्तु होते हैं । अतः इनकी भ्रूणीय झिल्लियाँ इनके सरीसृप पूर्वजों ( reptilian ancestors ) के समान होती हैं । मेटाथीरिया मासूंपिल्स ( marsupials ) तथा यूथीरिया स्तनियों ( eutherian mammals ) में भ्रूण का विकास माता के गर्भाशय में होता है । अतः इनमें माता तथा भ्रूण के रक्त के मध्य विभिन्न पदार्थों के विनिमय हेतु भ्रूण की भ्रूणीय झिल्लियाँ मुख्यतः जरायु एवं अपरापोषिका , गर्भाशयी दीवार के निकट स्थित होती हैं । भ्रूण की भ्रूणीय झिल्लियों एवं स्त्री की गर्भाशयी श्लेष्मिका ( uterine mucosa ) से मिलकर बनी संयुक्त संरचना जिसके द्वारा भ्रूण तथा माता के रक्त के बीच विभिन्न पदार्थों का विनिमय होता है , अपरा ( placenta ) कहलाती है ।

गर्भनाल कई तरीकों से बच्चे के लिए महत्त्वपूर्ण होती है
1. गर्भनाल ही बच्चे के विकास को प्रेरित करती है , इसी की वजह से बच्चा माँ के गर्भ में जीवित रहता है । यह सुरक्षा के साथ – साथ पोषण देने का भी काम करती है ।
2. गर्भनाल शरीर में लैक्टोजन के बनने में मदद करती है , जो माँ के शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया को प्रेरित करता है । 3. गर्भनाल माँ और बच्चे को जोड़ने का काम करती है , माँ जो कुछ भी खाती है । आहार नाल के माध्यम से उसका पोषण बच्चे को भी मिलता है ।

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