व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय

व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय

व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. प्रत्येक अर्थव्यवस्था के साधन हैं—
( क ) असीमित ( ख ) सीमित
( ग ) पर्याप्त ( घ ) अपर्याप्त

प्रश्न 2 . सभ्यता के विकास के साथ आवश्यकताओं का ……………. होता हैं।
( क ) विकास ( ख ) विनाश
( ग ) सर्वनाश ( घ ) ये सभी

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन व्यष्टि अर्थशास्त्र की विषय – वस्तु नहीं है ?
( क ) एक व्यापारी द्वारा गेहूँ की कीमत का निर्धारण
( ख ) देश में कीमत स्तर का उतार – चढ़ाव
( ग ) किसी एक फर्म में उत्पादन की मात्रा
( घ ) एक उपभोक्ता का सन्तुलन

प्रश्न 4 . निम्नलिखित में कौन – सा व्यष्टि अर्थशास्त्र का विषय नहीं है ?
(क) उपभोक्ता का व्यवहार
(ख) उत्पादक का व्यवहार
(ग) राष्ट्रीय आय
(घ) कीमत निर्धारण

प्रश्न 5 . सम्भावित संयोगों के समूह को कहते हैं

( क ) उत्पादन सम्भावना सेट
( ख ) अवसर लागत
( ग ) सीमांत उत्पादन सम्भावना
( घ ) केन्द्रीय समस्या

प्रश्न 6 . चयन की समस्या के उत्पन्न होने का कारण है कि—
( क ) संसाधन दुर्लभ हैं
( ख ) संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं
( ग ) संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं
( घ ) दोनों ( क ) तथा ( ग )

प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन – सा व्यष्टि अर्थशास्त्र का अंग नहीं है ?
(क) एक उपभोक्ता (ख) एक फर्म
(ग) एक अर्थव्यवस्था (घ) एक परिवार इकाई

प्रश्न 8. दुर्लभ साधनों के प्रयोग होते हैं ?
( क ) वैकल्पिक ( ख ) सीमित
( ग ) निश्चित ( घ ) शून्य

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1 . संसाधनों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर- संसाधनों से अभिप्राय उन वस्तुओं तथा सेवाओं से है जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन करने में होता है ।
उदाहरण- भूमि , श्रम , औजार तथा मशीनें इत्यादि

प्रश्न 2. संसाधनों के विनिधान से क्या आशय है?

उत्तर- संसाधनों के विनिधान से यह आशय है कि किस संसाधन की कितनी मात्रा का उपयोग मात्र प्रत्येक वस्तु तथा सेवा के उत्पादन के लिए ही किया जाता है ।

प्रश्न 3. दो ऐसी मूल आर्थिक समस्याएँ बताइए जिनका समाज सामना करता है ?
उत्तर- 1. सीमित संसाधनों का विनिधान ।
2. वस्तुओं और सेवाओं के अन्तिम मिश्रण का वितरण ।

प्रश्न 4. बाजार को परिभाषित कीजिए । अथवा अर्थशास्त्र में ‘ बाजार ‘ शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया जाता है?
उत्तर- अर्थशास्त्र के अनुसार, बाजार एक ऐसी संस्था है जो अपने आर्थिक क्रियाकलापों का अनुसरण करने वाले व्यक्तियों को निर्वाध अन्तःक्रिया प्रदान करती है । दूसरे शब्दों में बाजार व्यवस्थाओं का ऐसा समुच्चय है जहाँ आर्थिक अभिकर्ता मुक्त रूप से अपने धन अथवा अपने उत्पादों का परस्पर निर्बाध आदान – प्रदान कर सकते हैं ।

 

प्रश्न 5. बाजार तन्त्र में समन्वय कैसे स्थापित होता है ?
उत्तर बाजार में वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतें सभी व्यक्तियों को महत्त्वपूर्ण संकेत प्रदान करती हैं । जिससे बाजार तन्त्र में समन्वय स्थापित होता है ।

प्रश्न 6. व्यष्टि आर्थिक अध्ययन के दो उदाहरण दीजिए ।
उत्तर- 1. वस्तु बाजार में कीमत निर्धारण का अध्ययन ।
2. उपभोक्ता संतुलन का अध्ययन ।

प्रश्न 7 . आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के दो कारण बताइए ।
उत्तर- 1. आवश्यकताओं की तुलना में संसाधनों का सीमित होना ,
2. संसाधनों का वैकल्पिक प्रयोग होना । अर्थव्यवस्था की परिभाषा दीजिए ।

प्रश्न 8 .अर्थव्यवस्था की परिभाषा दीजिए।
उत्तर -अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमें वे सभी आर्थिक क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं जो दुर्लभ संसाधनों का प्रयोग करते हुए असीमित आवश्यकताओं की संतुष्टि करने में लगी होती हैं ।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. एक अर्थव्यवस्था की तीन केन्द्रीय समस्याएँ क्या हैं ? ये क्यों उत्पन्न होती हैं ? एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ क्या हैं ? अर्थशास्त्र की केन्द्रीय समस्याएँ क्या हैं ? अथवा अथवा
उत्तर- एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ निम्न प्रकार हैं
1. क्या उत्पादन किया जाए ? विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन से सम्बन्धित चयन की समस्या ।
2. कैसे उत्पादन किया जाए ? उत्पादन की तकनीक से सम्बन्धित चयन की समस्या ।
3. किसके लिए उत्पादन किया जाए ? उत्पादन के वितरण से सम्बन्धित चयन की समस्या । ये समस्याएँ प्रत्येक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ हैं । ये इस कारण उत्पन्न होती है क्योंकि

 1 ) असीमित आवश्यकताओं की तुलना में संसाधन दुर्लभ होते हैं और
( 2 ) इन संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोग होते हैं ।

प्रश्न 2. व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर – व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर –
1. व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक सम्बन्धों अथवा आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है ; जैसे — एक व्यक्तिगत फर्म , एक व्यक्तिगत परिवार अथवा एक व्यक्तिगत उपभोक्ता । इसके विपरीत , समष्टि अर्थशास्त्र में सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक सम्बन्धों अथवा आर्थिक समस्याओं अथवा आर्थिक मुद्दों का अध्ययन किया जाता है ।
2 . व्यष्टि अर्थशास्त्र एक व्यक्तिगत फर्म अथवा उद्योग में उत्पादन तथा कीमत के निर्धारण से सम्बन्धित है , जबकि समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था में कुल उत्पादन तथा सामान्य कीमत स्तर के निर्धारण से सम्बन्धित है । –
3. व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन की यह धारणा है कि समष्टि प्राचल ( जैसे- कुल उत्पादन तथा सामान्य कीमत स्तर ) स्थिर रहते हैं । दूसरी ओर , समष्टि अर्थशास्त्र के कि व्यष्टि प्राचल ( जैसे — आय तथा सम्पत्ति का वितरण ) स्थिर रहते हैं । अध्ययन की यह धारणा है
4. एक व्यक्तिगत परिवार के बचत तथा उपभोग प्रतिमान , एक फर्म या उद्योग का कीमत स्तर व्यष्टि अर्थशास्त्र के उदाहरण हैं । कुल उत्पादन , समग्र माँग तथा सामान्य कीमत स्तर समष्टि अर्थशास्त्र के उदाहरण हैं ।

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विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 . अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए । अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या
उत्तर- वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन , विनिमय तथा उपभोग जीवन की आधारभूत आर्थिक गतिविधियों के अन्तर्गत आते हैं । प्रत्येक समाज को इन आधारभूत आर्थिक क्रियाकलापों के दौरान संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है तथा संसाधनों की यह कमी ही चयन की समस्या को जन्म देती है। अर्थव्यवस्था में इन दुर्लभ संसाधनों के उपयोग के लिए प्रतिस्पर्धी विकल्प होते हैं । दूसरे शब्दों में , प्रत्येक समाज को यह निर्णय करना पड़ता है कि वह अपने दुर्लभ संसाधनों का किस प्रकार उपयोग करें । अर्थव्यवस्था की समस्याएँ संक्षेप में निम्नवत् हैं—
1. किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में ? — प्रत्येक समाज को निर्णय करना पड़ता है कि प्रत्येक सम्भावित वस्तुओं तथा सेवाओं में से किन – किन वस्तुओं और सेवाओं का वह कितना उत्पादन करेगा । अधिक खाद्य पदार्थों , वस्तुओं या आवासों का निर्माण किया जाए अथवा विलासिता की वस्तुओं का अधिक उत्पादन किया जाए ? कृषिजनित वस्तुओं का अधिक उत्पादन किया जाए या औद्योगिक उत्पादों तथा सेवाओं का ? शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर अधिक संसाधनों का उपयोग किया जाए अथवा सैन्य सेवाओं के गठन पर ? बुनियादी शिक्षा को बढ़ाने पर अधिक खर्च किया जाए या उच्च शिक्षा पर ? उपयोग की वस्तुएँ अधिक मात्रा में उत्पादित की जाए या निवेशपरक वस्तुएँ ( मशीन आदि ) ? जिससे भविष्य में उत्पादन तथा उपभोग में वृद्धि होगी ? इस प्रकार की वस्तुएँ कैसे उत्पादित की जाती हैं ?
2. इन वस्तुओं का उत्पादन कैसे करते हैं ? – प्रत्येक समाज को निर्णय करना पड़ता है कि विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं से उत्पादन करते समय किस – किस वस्तु या सेवा में किस – किस संसाधन की कितनी मात्रा का उपयोग किया जाए । अधिक श्रम का उपयोग किया जाए अथवा मशीनों का ? प्रत्येक वस्तु के उत्पादन के लिए उपलब्ध तकनीकों में से किस तकनीक को अपनाया जाए ?
3. इन वस्तुओं का उत्पादन किसके लिए किया जाए ? – अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं की कितनी मात्रा किसे प्राप्त होगी ? अर्थव्यवस्था के उत्पाद को व्यक्ति विशेष के बीच किस प्रकार विभाजित किया जाना चाहिए ? किसको अधिक मात्रा प्राप्त होगी तथा किसको कम ? यह सुनिश्चित किया जाए अथवा नहीं कि अर्थव्यवस्था की सभी व्यक्तियों के उपभोग की न्यूनतम मात्रा उपलब्ध हो ? क्या प्रारम्भिक शिक्षा तथा बुनियादी स्वास्थ्य सेवा जैसी सेवाएँ अर्थव्यवस्था के सभी व्यक्तियों को निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएँ ? अतः प्रत्येक अर्थव्यवस्था को इस समस्या का सामना करना पड़ता है कि विभिन्न सम्भावित वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन के लिए दुर्लभ संसाधनों का विनिधान कैसे किया जाए और उन व्यक्तियों के बीच जो अर्थव्यवस्था के अंग हैं उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं का वितरण किस प्रकार किया जाए । सीमित संसाधनों का विनिधान तथा अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं का वितरण ही किसी भी अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ हैं ।

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प्रश्न 2. केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था के भेद को स्पष्ट कीजिए । अथवा एक केन्द्रीयकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था के भेद को निम्नवत् समझा जा सकता है केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन , विनिमय तथा उपभोग से संबद्ध सभी महत्त्वपूर्ण निर्णय सरकार द्वारा किए जाते हैं । वह केन्द्रीय सत्ता संसाधनों का विशेष रूप से विनिधान करके वस्तुओं एवं सेवाओं का अन्तिम संयोग प्राप्त करने का प्रयास कर सकती है ; जो पूरे समाज के लिए वांछनीय है । उदाहरणार्थ – यदि यह पाया जाता है कि कोई ऐसी वस्तु अथवा सेवा जो पूरी अर्थव्यवस्था की सुख – समृद्धि के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है , जैसे- शिक्षा या स्वास्थ्य सेवा , जिसका व्यक्तियों द्वारा स्वयं पर्याप्त मात्रा में उत्पादित नहीं किया जा रहा हो , तो सरकार उन्हें ऐसी वस्तुओं तथा सेवाओं का उपयुक्त मात्रा में उत्पादन करने के लिए प्रेरित कर सकती है या फिर सरकार स्वयं ऐसी वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन करने का निर्णय कर सकती है । बाजार अर्थव्यवस्था केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था के विपरीत बाजार अर्थव्यवस्था में सभी आर्थिक क्रियाकलापों का निर्धारण बाजार की स्थितियों के अनुसार होता है । बाजार व्यवस्थाओं का ऐसा समुच्चय हैं जहाँ आर्थिक अभिकर्त्ता मुक्त रूप से अपने धन अथवा अपने उत्पादों का परस्पर निर्वाध आदान – प्रदान कर सकते हैं । बाजार व्यवस्था में प्रत्येक वस्तु तथा सेवा की एक तय कीमत होती है ( जिस पर क्रेता एवं विक्रेता में सहमति होती है ) । क्रेताओं तथा विक्रेताओं का परस्पर इसी कीमत पर विनिमय होता है । औसतन समाज किसी वस्तु अथवा सेवा का जैसा मूल्यांकन करता है , कीमत उसी मूल्यांकन पर निर्धारित होती है । यदि क्रेता किसी वस्तु की अधिक मात्रा की माँग करते हैं , तो उस वस्तु की कीमत में वृद्धि हो जाएगी । यह उस वस्तु के उत्पादकों को संकेत देता है कि वे उस वस्तु की जिस मात्रा का उत्पादन कर रहे हैं , समाज को उसकी अधिक मात्रा की आवश्यकता है । इस पर उत्पादक उस वस्तु का उत्पादन बढ़ा सकते हैं । इस प्रकार , वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतें बाजार में सभी व्यक्तियों को महत्त्वपूर्ण संकेत प्रदान करती है , जिससे बाजार तन्त्र में समन्वय स्थापित होता है । अतः बाजार तन्त्र में उन केन्द्रीय समस्याओं का समाधान किस वस्तु का और किस मात्रा में उत्पादन किया जाना है , कीमत के इन्हीं संकेतों के द्वारा हुए आर्थिक क्रियाकलापों के समन्वय से होता है ।

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