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Class 12 History – ईंट, मनके तथा अस्थियां (हड़प्पा सभ्यता)

ईंट, मनके तथा अस्थियां (हड़प्पा सभ्यता)

ईंट, मनके तथा अस्थियां (हड़प्पा सभ्यता)

ईंट, मनके तथा अस्थियां (हड़प्पा सभ्यता)

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. सैंधव सभ्यता की अधिकांश मुहरें किससे बनी थीं ?
( क ) मिट्टी ( ख ) सेलखड़ी
( ग ) ताँबा ( घ ) काँसा
2. सैंधव सभ्यता में कौन – सा पशु पवित्र माना जाता था ?
( क ) गाय ( ख ) भैंस
( ग ) गैंडा ( घ ) कुबड़ा बैल
3. सैंधववासियों का मुख्य खाद्यान्न कौन – सा था ?
( क ) गेहूँ ( ख ) जौ
( ग ) दाल ( घ ) चावल
4. सैंधव सभ्यता के किस स्थल पर बंदरगाह के साक्ष्य पाए गए हैं ?
( क ) कालीबंगा ( ख ) सुरकोटड़ा
( ग ) माण्डा ( घ ) लोथल
5. सैंधव सभ्यता में सर्वाधिक पूजनीय कौन था ?
( क ) मातृदेवी ( ख ) पीपल
( ग ) बतख ( घ ) रुद्रशिव

6. सैंधव सभ्यता में विशाल स्नानागार कहाँ से प्राप्त हुआ है ?
( क ) हड़प्पा ( ख ) मोहनजोदड़ो
( ग ) बनावली ( घ ) कालीबंगा
7. सैंधव सभ्यता में शिल्पकला में सर्वोत्कृष्ट धातु काँसे की नर्तकी की मूर्ति कहाँ से मिली है ?
( क ) हड़प्पा ( ख ) मोहनजोदड़ो
( ग ) भगवानपुरा ( घ ) हुलास
8. सुमेरी अभिलेखों में किसे सूर्योदय का क्षेत्र कहा गया है ?
( क ) मेलुहा ( ख ) दिलमुन
( ग ) मगन ( घ ) इनमें से कोई नहीं
9. एस ० आर ० राव द्वारा 1995 में किस स्थान का उत्खन्न कार्य आरम्भ किया गया ?
( क ) हड़प्पा ( ख ) कालीबंगा
( ग ) लोथल ( घ ) धौलावीरा
10. किसे ‘मृतकों का टीला’ कहा जाता है ?
( क ) सुरकोटड़ा  ( ख ) चन्छुदड़ो
( ग ) मोहनजोदड़ो  ( घ ) लोथल

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11. हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट पुरावस्तु है—
( अ ) सड़क (ब ) मृद्भाण्ड
( स ) आभूषण ( द ) मुहर
12. मिट्टी से बने हल के प्रतिरूप मिले हैं
( अ ) मोहनजोदड़ो ( ब ) बनावली से
( स ) मिताथल से ( द ) चन्हूदड़ो
13. पुरातत्वविदों को हड़प्पा सभ्यता के किस स्थल से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं ?
( अ ) धौलावीरा ( ब ) रंगपुर
( स ) राखीगढ़ी ( द ) कालीबंगा
14. थार रेगिस्तान से लगा हुआ पाकिस्तान का रेगिस्तानी क्षेत्र क्या कहलाता है ?
( अ ) चोलिस्तान ( ब ) नखलिस्तान
( स ) खालिस्तान ( द ) अफगानिस्तान
15. भारतीय पुरातत्व का जनक किसे कहा जाता है ?
( अ ) जॉन मार्शल को ( ब ) मैके को
( स ) दयाराम साहनी को ( द ) अलेक्जैण्डर कनिंघम को
16. हड़प्पा सभ्यता के अन्तर्गत विशाल स्नानागार स्थित है
( अ ) मोहनजोदड़ो में ( ब ) कालीबंगा में
( स ) रंगपुर में ( द ) चन्हूदड़ो में
17. मनके के लिए प्रसिद्ध बस्ती थी
( अ ) मोहनजोदड़ो ( ब ) बणावली
( स ) धौलावीरा ( द ) चन्हूदड़ो
18. बालाकोट तथा नागेश्वर किस वस्तु के निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं ?
( अ ) अस्त्र – शस्त्र ( ब ) जहाज
( स ) शंख की वस्तुएँ ( द ) मृद्भाण्ड
19. नीले रंग के कीमती पत्थर लाजवर्द को प्राप्त किया जाता था
( अ ) मोहनजोदड़ो से ( ब ) भड़ौच से
( स ) हड़प्पा से ( द ) शोर्तुघई से
20. राजस्थान में खेतड़ी अंचल में हड़प्पा सभ्यता के लोग मँगाते थे
( अ ) सोना ( ब ) ताँबा
( स ) चाँदी ( द ) लोहा

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. सिन्धु सभ्यता में भवन किस प्रकार हुआ करते थे ?
उत्तर :- सिन्धु सभ्यता में भवन आँगन पर केन्द्रित थे जिसके चतुर्दिक कमरे बने होते थे ।
प्रश्न 2. उत्तर कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ क्या था ?
उत्तर :- कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ काली चूड़ियाँ था।
प्रश्न 3. सिन्धु सभ्यता को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर :- सिन्धु सभ्यता को हड़प्पा संस्कृति के नाम से जाना जाता है ।
प्रश्न 4. सिन्धु सभ्यता की खोज कब और किसने की ?
उत्तर :- हड़प्पा सभ्यता की खोज दयाराम साहनी और राखालदास बनर्जी ने 1924 ई ० में की थी।
प्रश्न 5. उत्तर कालीबंगा में किस तरह की आकृतियाँ प्राप्त हुई हैं
उत्तर :- कालीबंगा में ईंटों से निर्मित चबूतरा तथा अनेक घरों में अपने अपने कुएँ के साक्ष्य मिले हैं । यहाँ का नगर दुर्ग समानान्तर चतुर्भुजाकार था ।

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लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. क्या आप इस तथ्य से सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली, नगर – योजना की ओर संकेत करती है ? अपने उत्तर के कारण बताइए ।
उत्तर :- हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली हम इस तथ्य से पूर्णतया सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली नगर – योजना की ओर संकेत करती हैं । इसकी पुष्टि में निम्नलिखित तथ्य प्रस्तुत किए जा सकते हैं-
( 1 ) हड़प्पा के शहरों की सबसे अनूठी विशिष्टताओं में से एक नियोजित जल निकास प्रणाली थी । नगरों में नालियों का जाल बिछा हुआ था । ऐसा प्रतीत होता है कि पहले नालियों के साथ गलियों को बनाया गया था और फिर उनके आस – पास आवासों का निर्माण किया गया था । मकानों से आने वाली नालियाँ गली की नालियों से मिल जाती थीं । प्रत्येक मकान की कम से कम एक दीवार गली से सटी होती थी ताकि मकानों के गन्दे पानी को गलियों की नालियों से जोड़ा जा सके । इस प्रकार हर आवास गली की नालियों से जोड़ा गया था ।
( 2 ) मुख्य नाले गारे में जमाई गई ईंटों से बने थे और ये नाले ऐसी ईंटों से ढके रहते थे जिन्हें सफाई के लिए हटाया जा सके । कुछ स्थानों पर इन्हें ढकने के लिए चूना पत्थर की पट्टिका पका प्रयोग किया गया था ।
( 3 ) घरों की नालियाँ पहले एक होदी अथवा जलकुण्ड में खाली होती थी जिसमें ठोस पदार्थ जमा हो जाता था और गन्दा पानी गली की नालियों में बह जाता था । कुछ नाले बहुत लम्बे होते थे । उनमें कुछ फासले पर सफाई के लिए हौदियाँ बनाई गई थीं । इस प्रकार नालियों के द्वारा घरों, गलियों और सड़कों का गंदा पानी नगर से बाहर निकाल दिया जाता था ।

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प्रश्न 7. हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त पदार्थों की सूची बनाइये । कोई भी एक प्रकार का मनका बनाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :- हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त पदार्थों की सूची हड़प्पा निवासी मनके बनाने में निपुण थे । मनकों के निर्माण में अनेक पदार्थों का प्रयोग किया जाता था । इनके बनाने में सुन्दर लाल रंग के पत्थर कार्नीलियन, जैस्पर, स्फटिक , क्वार्ट्ज तथा सेलखड़ी जैसे — पत्थर, ताँबा, काँसा तथा सोने जैसी धातुएँ तथा शंख, फयॉन्स तथा पक्की मिट्टी आदि पदार्थों का प्रयोग किया जाता था । चन्हूदड़ो में मनके बनाने का एक कारखाना था ।
मनके बनाने की प्रक्रिया – मनके बनाने की प्रक्रिया निम्नानुसार हैं –
( 1 ) कुछ मनके सेलखड़ी चूर्ण के लेप को साँचे में ढाल कर तैयार किये जाते थे । इससे ठोस पत्थरों से बनने वाले केवल ज्यामितीय आकारों के विपरीत कई विविध आकारों के मनके बनाए जा सकते हैं ।
( 2 ) कार्नीलियन का लाल रंग, पीले रंग के कच्चे माल तथा उत्पादन के विभिन्न चरणों में मनकों को आग में पकाकर प्राप्त किया जाता था ।
( 3 ) पत्थर के पिण्डों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था और फिर बारीकी से शल्क निकालकर इन्हें अन्तिम रूप दिया जाता था ।
( 4 ) इसके नाप – घिसाई, पॉलिश और इनमें छेद करने के साथ ही मनके बनाने की प्रक्रिया पूरी होती थी ।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. हड़प्पा काल में शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी दीजिए ।

उत्तर- शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी चन्हुदड़ो ( 7 हेक्टेयर ) मोहनजोदड़ो ( 125 हेक्टेयर ) की तुलना छोटी बस्ती है , जो उस काल खण्ड में पूरी तरह से शिल्प उत्पादन में संलग्न थी । शिल्प कार्यों में मनके बनाना, शंख की कटाई, धातु कर्म, में एक तथा बाट बनाना सम्मिलित थे । उस काल में विविध पदार्थों से मनके बनाए जाते थे।
जैसे — कार्नीलियन, जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज़ तथा सेलखड़ी जैसे — पत्थर ; मुहर निर्माण तांबा, काँसा तथा सोने जैसी धातुएँ ; तथा शंख , फयॉन्स और पकी मिट्टी सभी का प्रयोग मनके बनाने में होता था । कुछ मनके दो या अधिक पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाए जाते थे जबकि कुछ सोने के टॉप वाले पत्थर के होते थे । ये मनके कई आकार के होते थे ; जैसे— चक्राकार, बेलनाकार, गोलाकार, ढोलाकार तथा खण्डित । कुछ को उत्कीर्णन तथा चित्रकारी के माध्यम से सजाया गया था और कुछ पर रेखाचित्रों का उत्कीर्णन किया गया था ।
मनके बनाने की तकनीकों में प्रयुक्त पदार्थों के अनुसार भिन्नताएँ थीं । सेलखड़ी एक मुलायम पत्थर है जिस पर सरलता से कार्य हो जाता है । कुछ मनके सेलखड़ी चूर्ण के लेप को साँचे में ढालकर तैयार किए जाते हैं । इससे ठोस पत्थरों से बनने वाले केवल ज्यामितीय आकारों के विपरीत अनेक आकारों के मनके बनाए जा सकते हैं ।
पुरातत्त्वविदों ने प्रयोगों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि कार्नीलियन का लाल रंग, पीले रंग के कच्चे माल तथा उत्पादन के विभिन्न चरणों में मनकों को आग में पकाकर प्राप्त किया जाता है । पत्थर के पिंडों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोड़ा जाता था और पुनः बारीकी से शल्क निकालकर इन्हें अंतिम रूप दिया जाता था । घिसाई, पॉलिश और इनमें छेद करने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होती थी । चन्हुदड़ो, लोथल और धौलावीरा से मनकों में छेद करने के विशेष उपकरण मिले हैं ।
नागेश्वर तथा बालाकोट ये दोनों बस्तियाँ समुद्र तट के निकट स्थित हैं । ये शंख से बनी वस्तुओं जिनमें चूड़ियाँ, करछियां तथा पच्चीकारी की बस्तियाँ शामिल हैं, के निर्माण के विशिष्ट केन्द्र थे जहाँ से यह माल दूसरी बस्तियों तक ले जाया जाता था । इसी तरह यह भी संभव है कि चन्हुदड़ो और लोथल से तैयार माल जिसमें मनके शामिल थे, को मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे बड़े शहरी केन्द्रों तक लाया जाता था ।

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